#गुजरात में आदिवासी गरीब की सोच रखने वाले छोटुभाई वसावा परिचय के मोहताज नही गुजरात की राजनीती में चर्चित नाम
#पिन्टू अग्रवाल चामुंडेरी*
#पाली सिरोही ऑनलाइन*
अहमदाबाद| गुजरात एक ऐसा राज्य हैं जहाँ लगभग 25 सालों से भाजपा की सरकार हैं और सभी जगहों पर भाजपा का दबदबा रहा हैं.और इस बार गुजरात के राजनीती समीकरण का स्वरूप हर पल बदलता नजर आ रहा है लोग जुमलों से परेसान तो कुछ जातीय आंदोलन के बावजूद सरकार द्वारा मागे नही माने जाने से अब इन समाजो में भी राजनीती वर्चच्व की जग हो रही है आगामी चुनावो में अगर गुजरात में सरकार बदलती है तो आंदोलन करने वाली समाजो का वर्चच्व हमेसा के लिए बढ़ जायेगा और परिणाम पूर्व की भाती रहे तो सामाजिक वोटो से सत्ता का रोप हमेसा के लिए खत्म हो जाएगा।
गुजरात चुनावो में आज एक ऐसे शख्स की बात हम कर रहे है जो किसी नाम और पहचान का मोहताज नहीं हैं. पिछड़े आदिवासी समाज से आने वाले इस शख्स का नाम छोटूभाई वसावा हैं. जिन्हें आदिवासियों का मसीहा भी कहा जाता हैं. शांत स्वभाव और गंभीर मुद्रा में रहने वाले छोटूभाई झगडिया विधानसभा से लम्बे समय से विधायक हैं. छोटू भाई हमेसा से गरीब पिछड़े आमजन और व्यापारी वर्ग और किशान के हित की सोच और इन्ही वर्गो के बेहतरी के लिए काम करने के चलते झगडिया विधानसभा में मतदाता सिम्बोल नही सिर्फ छोटा भाई के नाम पर मतदान करते है
आमजन गरीब किशान व्यापारियो के बल बूते पर जीतने वालें इस शख्स ने राजनीतिक में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़े संघर्ष किए हैं.
#1 अप्रैल 1947 को जन्मे छोटूभाई ने कड़ी मेहनत और संघर्ष के साथ अपनी आधी ज़िंदगी गुजारी हैं. वकालत की डिग्री लेने वाले छोटूभाई छात्र जीवन से युवा लीडर के रूप में अपनी पहचान बनाई. लगभग 27 सालों से लगातार विधायक बनने वाले छोटूभाई वसावा ने अपनी राजनीतिक कैरियर कि शुरुआत सबसे पहले इंडिपेंडेंट प्रत्याशी के रूप में की थी. लेकिन बहुत जल्द ही 1990 में बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के जनता दल से टिकट ले कर पहली बार विधानसभा पहुंचे. छोटूभाई 2002 में शरद यादव के जनता दल यूनाइटेड का दामन थामा. आज भी जदयू से छोटूभाई विधायक हैं.
#27 सालों से झगडिया विधानसभा का नेतृत्व करने वाले वसावा ने अपने राजनीतिक जीवन में कभी हार नहीं माना. हमेशा आगे बढ़ते रहे. छोटूभाई वसावा सुर्ख़ियों में उस वक्त आए जब इन्होने गुजरात में राज्यसभा चुनाव में जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार का विरोध करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी अहमद पटेल को वोट दे कर राज्यसभा भेजने पर मुहर लगाई थी
#राज्यसभा चुनावो में 70 वर्षीय इस विधायक के बारे में विभिन्न मीडिया दवारा अलग अलग बाते प्रकाशित होती रही परन्तु इस विधायक ने अपने मतदाताओ का विश्वास नही खोया और अपनी अंतरआत्मा पर वोट किया आप सभी को पता है गुजरात राज्यसभा में छोटू भाई का वोट कितना महत्वपूण था मगर छोटू भाई ने अपने वोट को जमीर समझते हुए खरीद फरोख्त से दूर रह कर झगडिया के मतदाताओ के वोट का गर्व बढ़ाया था।
#क्रिटल मिरर की टीम छोटूभाई के विधानसभा का दौरा किया. वहां के लोगों से बात की, तो पता चला ये शख्स जो लगभग 27 साल से लगातार एक ऐसे पार्टी से विधायक बनते आ रहा हैं जिसका गुजरात में कोई वजूद नहीं हैं. इसका पूरा श्रेय छोटूभाई वसावा को जाता हैं. जो खुद कम बोलता हैं. मगर ज्यादा सुनना और लोगों की भलाई पर ध्यान देता हैं.जिसके चलते आज भी मतदाताओ का विश्वास छोटू भाई के साथ जुड़ा हुआ है
#झगडिया विधानसभा के लोगों का कहना हैं की ये आदिवासी समाज के मसीहा हैं. यही नहीं उस विधानसभा के सभी जाती धर्म के लोग छोटूभाई को कुशल प्रसास्क राजनेता के रूप में देखते हैं.जिसकी बदौलत सभी जाती धर्म के लोगो को एक साथ लेकर आगे बढ़ने के हिमायती रहते ह
#छोटूभाई ने अपने समाज के उत्थान के लिए भविष्य में लीडर तैयार करने का बीड़ा भी उठाया हैं. छोटूभाई ने भिलिस्थान टाईगर सेना बना कर युथ लीडर तैयार करने में लगे हुए हैं. इस संगठन के लीगल एडवाईजर छोटूभाई वसावा हैं. इस संगठन के बारे में छोटूभाई का कहना हैं कि हम तो राजनीतिक में देश सेवा और समाज सेवा कर लिए. मगर इस देश को जबतक युवा नेता नहीं देंगे तब तक राजनीतिक का असल मकसद पूरा नहीं होगा.
#अभी हाल ही में नीतीश कुमार से अलग हो कर जदयू पर दावा ठोकने वाले सांसद शरद यादव ने छोटूभाई को जनता दल युनाईटेड का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना कर गुजरात चुनाव में जोर जार धमक दी हैं. दिसंबर में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव में छोटूभाई वसावा की जदयू और कांग्रेस मिल कर चुनाव लड़ने की भी सम्भावना जताई जा रही हैं. जिससे बीजेपी की परेशानी बढ सकती हैं. गुजरात में छोटूभाई वसावा को आदिवासी समाज में एक मसीहा के रूप में देखा जाता हैं. अपने समाज के लोगों पर वसावा की अच्छी पकड़ हैं. गुजरात विधानसभा में 27 सीट एसटी समाज के लिए आरक्षित हैं. इस समाज के एक बहुत बड़े नेता तथा राजनीतिक में लम्बी पारी खेलने वाले छोटूभाई वसावा भाजपा के परेशानी का सबब बन सकते हैं. जिस तरह से गुजरात विधानसभा चुनाव में छोटूभाई वसावा का कद बढ़ा हैं. उसे देखते हुए लग रहा हैं कि अगर कांग्रेस गठबंधन की सरकार गुजरात में आती हैं छोटा भाई की बड़ी भूमिका को नही नकारा जा सकता।
#विधायक छोटू भाई वसावा का राजस्थान के पाली जिले से भी महत्वपूण रिश्ता है पाली जिले के बाली उपखण्ड के चामुंडेरी सरपच जसवंत राज मेवाड़ा से विधायक छोटू भाई के पारिवारिक रिश्ते है विधायक छोटू भाई का सरपच मित्र जसवंत राज मेवाड़ा भी राजस्थान में अपने कार्य करने की अलग सोच के चलते ख्याति प्राप्त है सरपच जसवंत राज मेवाड़ा ने भी छोटू भाई की तरह कॉलेज राजनीती के बाद गाव के विकास का बीड़ा उठाते हुए सरपच चुनाव लड़ा और सर्वाधिक मतो से पहला चुनाव जीता आज सरपच मेवाड़ा युवाओ के लिए प्रेरणा सवरूप आगे आये है और मेवाड़ा युवाओ को शिक्षा और राजनीती से जुड़ाव के लिए सहयोग भी करते है।
राजस्थान के पाली जिले का चर्चित सरपच जसवंत राज मेवाड़ा गुजरात विधायक छोटू भाई के कार्यो को लेकर हमेसा प्रभावित रहते है सरपच मेवाड़ा के अनुसार वोटो में आरोप प्रत्यारोप चलते रहते है परन्तु झगडिया विधानसभा में गरीब किशान मजदुर व्यापारी सभी के सहयोग से छोटू भाई चुनाव में जाते है और छोटा भाई भी मतदाताओ के साथ पारिवारिक रिश्ता बनाये रखते है ।
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Sunday, November 5, 2017
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*गुजरात में आदिवासी गरीब की सोच रखने वाले छोटुभाई वसावा परिचय के मोहताज नही गुजरात की राजनीती में चर्चित नाम*
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