*पाली जिला कलेक्टर के निर्देश पर मलेरिया व मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए आयुर्वेद काढ़ा वितरित होगा* - Pali Sirohi Online

Pali Sirohi Online

News/Media

slider

test banner

बड़ी ख़बर

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Monday, September 4, 2017

*पाली जिला कलेक्टर के निर्देश पर मलेरिया व मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए आयुर्वेद काढ़ा वितरित होगा*

#पाली जिले में मलेरिया व मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए आयुर्वेद काढ़ा वितरित होगा

पाली, 4 सितम्बर। #पाली जिले में अतिवृष्टि के बाद मलेरिया व अन्य संभावित मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा वितरण के लिए योजनाबद्ध कार्यक्रम बनाने के लिए #पाली_जिला_कलेक्टर_सुधीर_कुमार_शर्मा ने निर्देश प्रदान किए गए है।
जिला कलेक्टर सुधीर कुमार शर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को उनके कक्ष में आयोजित साप्ताहिक बैठक में आयुर्वेद विभाग को त्वरित प्रभाव से जिले में काढ़ा वितरण का कार्यक्रम बनाकर उसके प्रभावी वितरण के लिए निर्देश दिए गए। उन्होंने एक ही दिन में इसकी रूपरेखा प्रस्तुत करने की हिदायत दी। इसके लिए शहरी क्षेत्र में नगर परिषद आयुक्त के माध्यम से, जिले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में ई.ओ. नगर पालिकाएं, पंचायत समितियां व अन्य माध्यम से यह आयुर्वेद काढ़ा, वितरण कार्य करने के निर्देश प्रदान किए गए। यह आयुर्वेदिक काढ़ा प्रत्येक आयुर्वेद औषधालय में भी उपलब्ध है। आयुर्वेदिक काढ़ा पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा वर्षा के बाद होने वाली बीमारियां मलेरिया, जुकाम, खांसी, निमोनिया आदि बीमारियों से बचाव होता है।
साप्ताहिक बैठक में जिला कलेक्टर ने जिले में विद्युत ट्रांसफार्मर लगाने में लंबित रहने वाले स्थानों के लिए की जाने वाली कार्यवाही, पीडब्ल्यूडी के कार्या में गौरवपथ व अन्य सड़कों व योजनानुसार किए जाने वाले कार्यो, नगर परिषद द्वारा फोगिंग व अन्य स्वच्छता संबंधी कार्यवाही पर समीक्षा की गई। इसके अलावा विभिन्न विभागों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए गए।
यह किए जा सकते हैं घरेलू उपायः-
ऽ नीम की ताजा हरी पत्तियों को खाने से मलेरिया व त्वचा के रोगों (दाद, खुजली आदि) से बचाव होता है। 4-4 पत्ती सुबह- शाम चबाकर खाएं। कच्ची कोपलें अधिक लाभदायक है।
ऽ नीम की पत्तीयों का धुआं करने से मच्छर व मक्खीयां भगाने में सहायता मिलती है।
ऽ घर में सुरक्षित स्थान पर नीम के तेल का दीपक जलाने से मच्छर नहीं आते है।
ऽ दालचीनी को पीसकर उसका एक चम्मच चूर्ण, एक गिलास पानी में उबालें। अच्छें से उबल जाने पर नीचे उतारकर छान लें। थोडा ठण्डा होने पर इसमें एक चुटकी काली मिर्च का पाउडर तथा एक चम्मच शहर मिलाकर पीने से मलेरिया बुखार से बचाव होता है तथा मलेरिया हो गया हो तो जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।
ऽ रात को शरीर पर सरसों के तेल की मालिश करके सोने से मच्छर पास नहीं आते। शरीर को ढ़क कर रखें, फुल बाजू की शर्ट अथवा कुर्ता पहनें।
ऽ मेथी को पीसकर उसका एक-एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम गर्म पानी से लें। यह सप्ताह भर तक ले सकते है। इससे भी मलेरिया में बचने में मदद मिलती है।
ऽ लाल फिटकरी को गर्म तवे पर फुलाकर उसका चूर्ण बना लें। यह चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में अकेला या मिश्री मिलाकर सुबह-शाम तीन दिन तक लेने से मलेरिया से बचाव होता है।
ऽ तुलसी के पत्ते 5 नग तथा काली मिर्च 5 नग मिलाकर खाने से वर्षा ऋतु जनित मौसमी बीमारियों से बचाव होता है।
ऽ दूध,हरी सब्जियां, ताजा फल व ज्यूस आदि का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें। डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, सड़े गले फल व सब्जियां, दूषित पानी, बासी भोजन आदि खाने से बचें  तथा लम्बे समय तक खाली पेट नहीं रहे।
ऽ बुखार या अन्य बीमारी होने पर इन उपायों के साथ ही निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पर अवश्य सम्पर्क करें।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Responsive Ads Here