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Tuesday, September 12, 2017

#ऊर्जा_मंत्री_के_बाली_तहसील_में_गाव_गाव_पहुचा_सास_बहु_सम्मलेन

*बाली के गांव-गांव में आयोजित हो रहे सास-बहू सम्मेलन*

बाली 12 सितम्बर।छोटा परिवार सुख का आधार’ समझाईश के जिला प्रशासन व् जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेन्द्र सिंह शेखावत के निर्देश पर बाली तहसील में  ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी के निर्देशन में चल रहे मिशन परिवार विकास कार्यक्रम विभाग की ओर से गांव-गांव में सास-बहू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, ।
बाली ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉ हितेन्द्र वागोरिया ने बताया की इन सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य सास एवं बहू को एक साथ, एक मंच पर लाकर परिवार नियोजन के लिए जागरूक करना है। इसके साथ ही परिवार नियोजन के साधनों की जानकारी देते हुए इन 
साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। 
ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉ हितेन्द्र वागोरिया ने बताया की हमारी सामाजिक व्यवस्थाओं में परिवार का बड़ा महत्व है और उनमें भी विशेषकर घर की बड़ी एवं बुजुर्ग महिलाओं का। ऎसे में परिवार की बहू के निर्णय कहीं न कहीं सास अथवा घर की बुजुर्ग महिलाओं की विचारधाराओं से प्रभावित होते हैं। विशेषकर परिवार नियोजन जैसे मुद्दे पर सास और बहू की आपसी समझ काफी महत्वपूर्ण होती है।जिले में इस कार्यक्रम को सफलता की और अग्रसर करने के लिए पाली जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेन्द्र सिंह शेखावत एवं स्वास्थ्य विभाग के सख्त निर्देश है की इस कार्यक्रम का लक्ष्य प्रत्येक घर में सास बहु के तक पहुचे और तर्को से समजाया जाये की छोटा परिवार होने से क्या क्या फायदे है। बाली ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉ हितेन्द्र वागोरिया ने बताया की जिला चिकित्सा कार्यालय के निर्देशन में यह कार्यक्रम बाली तहसील के हर गाव गॉव में आयोजित हो रहा ह जिसमे जनप्रतिनिधियो के साथ जागरुख महिला सगठनो का भी सहयोग लिया जा रहा है रिश्ते की परिवार नियोजन में महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए मिशन परिवार विकास कार्यक्रम के तहत  सास-बहू सम्मेलन में लोगो का उत्साह भी देखा जा रहा ह
बाली ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉ हितेन्द्र वागोरिया ने बताया की इन सम्मेलनों के दौरान सास-बहू के बीच परिवार नियोजन के विचारों पर तालमेल बिठाने, उन्हें सीमित एवं छोटे परिवार के लाभ बताने और परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करने में क्षेत्र की आशा व एएनएम मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
राजस्थान की लोक संस्क्रति के चलते इस आदिवासी ग्रामीण अंचल की महिलाये ज्यादातर पच पचायती और खाश तोर से परिवार नियोजन जैसे मसलों पर महिलाएं खुलकर बात नहीं कर पाती। उनके मन में परिवार नियोजन के लिए अपनाने वाले साधनों के बारे में जो आशंकाएं, प्रश्न अथवा जिज्ञासाएं हैं, वे किसी से कह नहीं पाती और ना ही उनको उनकी शंकाओं का समाधान मिल पाता है। ऎसे में इन सम्मेलन में आई महिलाओं को जब आशाओ एवं एएनएम द्वारा परिवार नियोजन के मुद्दे पर आने वाली परेशानियों के बारे में पूछा गया तो पहली बार महिलाओं ने अपनी बात कहने का अवसर और साथ पाकर इस संबंध में आने वाली तमाम परेशानियों, जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों को मुखरता के साथ बताया तथा एएनएम-आशाओं ने भी उनके सभी प्रश्नों का उत्तर देकर उनकी आशंकाओं का समाधान किया। 

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