*दक्षता कार्यक्रम की अनुभव साझा कार्यषाला आयोजित
जयपुर, 25 अक्टूबर। प्रदेश में मातृ मृत्युदर व नवजात शिशु मृत्युदर में कमी लाने के उद्धेष्य से चयनित 20 जिलों में संचालित दक्षता कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर हो रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत इन जिलों के प्रसव सुविधा वाले स्वास्थ्य केन्द्रों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, लेबर रूम प्रोटोकाल्स, स्टाॅफ प्रशिक्षण सहित विभिन्न आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था उपलब्धता करवायी गयी है।
स्वास्थ्य सचिव एवं मिशन निदेशक एनएचएम नवीन जैन ने बुधवार को स्थानीय होटल मैरियट में तकनीकी डवलपमेंट पार्टनर जापाईगो के सहयोग से कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब पहली बार गर्भवती किसी भी चिकित्सा संस्थान पर प्रसव पूर्व जांच व पंजीकरण के लिये आती है तभी से उसे विशेष देखभाल की सुविधा शुरू हो जाती है। उन्होंने प्रसव से पूर्व समस्त आवश्यक जांचें, उपचार एवं आवश्यक परामर्श सेवाएं सभी गर्भवती महिलाओं को मिले इसके लिए विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता प्रतिपादित की। उन्होंने लेबर रूम में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के अधिक से अधिक स्टाॅफ को प्रशिक्षित किया जाने पर बल दिया।
श्री जैन ने जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी, ब्लाक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा संस्थान के प्रभारी एवं एएनएम तक बेहतर समन्वय स्थापित किये जाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रसव के समय संस्थान स्तर पर किसी भी स्तर पर देरी न करते हुये सभी आवश्यक सेवायें प्रदान करने एवं प्रसूति केस शीट में सभी सूचनायें निर्धारित समय पर इंद्राज करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। उन्होंने दक्षता फोल्डर का विमोचन किया एवं स्टाल्स पर प्रदर्शित आदर्श लेबर रूम के माॅडल, नियोनेटल केयर के उपकरणों का अवलोकन भी किया।
मिशन निदेशक ने दक्षता कार्यक्रम के तहत बेहतरीन उपलब्धि वाले चिकित्सा संस्थानों को ट्राफी एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने उदयपुर के सुन्दर सिंह भंडारी हास्पिटल, राजसमंद जिले के उप जिला अस्पताल नाथद्वारा, बांसवाड़ा के सीएचसी बागीदौरा, *पाली की सीएचसी बाली* जोधपुर के जिला अस्पताल पावटा, धौलपुर की सीएचसी मानिया, भरतपुर जिला अस्पताल, जयपुर द्वितीय की सीएचसी बस्सी, झुझुनूं जिला अस्पताल, जिला अस्पताल नागौर, बूंदी की सीएचसी हिन्डौली, जिला अस्पताल बूंदी एवं डूंगरपुर की सीएचसी सीएचसी आसपुर की टीम को सम्मानित किया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में उदयपुर, राजसमंद, बांसवाड़ा एवं पाली जिलों की टीम ने प्रजेंटेशन के माध्यम से अनुभव शेयर किये। तकनीकी सत्र में निदेशक आरसीएच डा. एसएम मित्तल, परियोजना निदेशक मातृस्वास्थ्य डॉ तरुण चौधरी,
स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. लीला व्यास, शिशु रोग विशेषज्ञ डा. सीतारमन, निपी के डा. एसपी यादव, जापाईगो के डा. विकास यादव एवं यूनिसेफ की डा. अपूर्वा ने प्रजेंटेशन पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। चायकाल से पूर्व यूएनएफपीए की डा. सुशीला सहारण ने नवजात सेवाओं में गुणात्मक सुधार के हो रहे प्रयासों पर चर्चा की। डा. विकास ने दक्षथा कार्यक्रम के राष्ट्रीय परिपेक्ष्य एवं आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की।
कार्यशाला में चयनित जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक लेबर रूम प्रभारी एवं स्टाफ नर्स सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित थे।
बेहतरीन उपलब्धि को लेकर पाली जिले ने इस बार पुनः परचम लहराया है ऊर्जा राज्य मंत्री पुष्पेन्द्र सिंह राणावत के विधान सभा बाली की सीएससी को भी बेहतर कार्य को लेकर जयपुर में मिले सम्मान पर पाली जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेन्द्र सिंह शेखावत नर्सिग अधिकारी के सी सेनी बाली ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉ हितेन्द्र वागोरिया बाली सीएससी के इंचार्ज राज कुमार राजड़े ने ख़ुशी व्यक्त करते हुए पारदर्शी निर्णय को लेकर उच्च अधिकारियो का आभार व्यक्त किया।

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